Monday, September 19, 2011

आओ खेलें ब्लॉग-ब्लॉग...

चेतावनी : ये भले ही वैधानिक ना हो लेकिन भावनात्मक हैं...इसलिए इस चेतावनी को गंभीरता से लें. आगे आप जो पढ़ें उसे मनोरंजन की दृष्टि से पढ़े. व्यर्थ में किसी शब्द या वाक्य का अर्थ ना निकाले...उसे अनर्थ होने की प्रबल संभावना है जिसके लिए ब्लॉगर किसी भी दृष्टि से जिम्मेदार नहीं होगा. अपनी सोच के लिए आप खुद जिम्मेदार होंगे...जिसके बाद ब्लॉगर की ओर से कार्रवाई संभव है...

भला चेतावनी देकर कोई ब्लॉग लिखता है...ये फलसफा भले अटपटा लगे...लेकिन जरूरी था...क्योंकि आगे जिन पात्रों का जिक्र है वो सभी भले ही काल्पनिक हों लेकिन सभी बुद्धिजीवी वर्ग से आते हैं...यानी लोकतंत्र का चौथा स्तंभ 'पत्रकार'...पत्रकार का काम होता है बाल की खाल निकालना...लेकिन आजकल मौसम है 'खरबूजे' का...चौकियें मत...अस्ल में खरबूजे की पहचान होती है रंग बदलने से...कुछ यही हाल मेरे जानने वाले कुछ दैदिप्यमान, बुद्धिजीवी और वरिष्ठ पत्रकार भाईयों के साथ हो रहा है और उस असर से अब मैं भी अछूता नहीं रहा...यानी आप उनको भले ही खरबूजा ना कहें...मुझे आप कह सकते हैं...लेकिन मैं खरबूजा कैसे बना...वो कहानी मैं आपके सामने बयां कर रहा हूं...

हमारे बीच सबसे पहले खरबूजे का बीज डाला था...आधुनिक तकनीक के ज्ञाता..मेरे खास दोस्त रवीश ने...क्योंकि वो महारथी हैं किसी भी अत्याधुनिक कंप्यूटर, मोबाइल, जैसे गैजेट को चलाने में...उससे जुड़ा ज्ञान रखने में...मुझे तो कई बार शक होता है कि कंपनियां बाजार में अपना कोई उत्पाद उतारने से पहले एक बार जरूर उनसे जानकारी लेती होगी...उनका ये बड़प्पन ही है कि उन्होने आज तक इस राज को छुपा कर रखा...उनके इसी ज्ञान के अथाह सागर का सबसे पहले लाभ उठाया मेरे वरिष्ठ और सम्मानित सहयोगी ब्रजेंद्र जी ने...शुरूआत में कंप्यूटर से लगभग अंजान थे...अभी 6 महीने ही हुए हैं बीज डाले...लेकिन अब ब्लॉग, फैसबुक और तमाम ऐसी सोशल नेटवर्किंग साइट वो चुटकियों में चलाते हैं..इन साइटों पर उनका इतना दबदबा हो गया है कि उनके फॉलोअर की संख्या हजारों में पहुंचने वाली है और उनमें भी कई नामचीन हस्तियां हैं...उनका ये पेड़ सही तरीके से फले फूले इसके लिए समय-समय रवीश उसमें खाद डालने में मदद करते हैं...ब्रजेंद्र जी की लगन देखिये...उनको अपने आसपास जो दिखा झट से उससे दो मिनट का वक्त मांग कर अपने पेड़ में लग रहे फलों की जानकारी दे दी...हालांकि कुछ लोगों को इससे कोफ्त भी होती है...लेकिन मन ही मन वो भी चाहते हैं कि काश ऐसा ही एक पेड़ वो भी लगाते और इसी इच्छा में देर से ही सही...खरबूजे के बीज अब वो भी डालने लगे हैं...बहुत से साथी तो मझधार में हैं...खरबूजे के बीज डालने की हसरत पाले बैठे हैं...लेकिन वो नहीं जानते की ये बीज कैसे डलेगा...और किसी से पूछ लिया तो नाक कट जाएगी...भले ही ब्रजेंद्र जी का ब्लाग रूपी खरबूजे का पेड़ कैसा भी हो...लेकिन तारीफ हर कोई करता है कि वो बुरा ना मान लें...ऐसी ही तारीफ करते करते बीज डाल बैठी मेरी सहयोगी शाहीन...बड़े जोश से बीज डाला था उन्होने...अपने पेड़ के नामकरण के लिए बस उन्होने विज्ञापन का सहारा नहीं लिया...बाकि सब कुछ कर दिया था...लोगों के बीच जनमत तक कराया और पौधा जब तक पेड़ बनता उनकी तो हिम्मत ही जवाब दे गई...बमुश्किल एक ही फल आया है उनके पेड़ में...हांलाकि इस मामले में मेरा ब्लाग रूपी खरबूजे का रिकार्ड उनसे बुरा है दिसंबर 2009 में पहला फल आया था लेकिन उचित देखभाल और खाद ना डालने की वजह से सिंतबर 2011 में दूसरा खरबूजा अब आ रहा है...शाहीन कहती हैं कि वक्त नहीं मिलता...लेकिन क्या हुआ...मेरे एक और सहयोगी हैं साहिल उनके पास तो वक्त ही वक्त है...इतना कि बेवक्त में भी वक्त में रहते हैं...और उनकी ख्वाहिश रहती है कि शाहीन से वो कभी भी पीछे ना रहें...बस यही कुंठा उनके मन में घर कर गई और जब शाहीन अपने पेड़ के नामकरण के लिए जनमत करा रही थी तभी साहिल ने मन में फैसला ले लिया था कि वो भी एक पेड़ लगाएंगे और ऐसा लगाएंगे कि एक ही पेड़ में दो फलों का मजा आए...और वो फल होगें खरबूजा और दूसरा तरबूजा...तभी तो सभी लोग हिंदी में ब्लॉग लिख रहे थे लेकिन उन्होने 24 घंटे के भीतर अंग्रेजी में दो ब्लॉग ठोक डाले...और अपने पेड़ को कैसे प्रसिद्ध किया जाता है इसके लिए ब्रजेंद्र जी के तरीके की मदद ली...अपना हो या पराया हर किसी को पकड़ पकड़ कर कहने लगे की आप मेरा ब्लॉग पढ़ें और अगर ना भी पढ़ें तो कमेंट जरूर करियेगा...इससे उत्साह बढ़ेगा...मुझे भी उनका ब्लॉग पढ़ने का मौका मिला...अच्छा था...इतना अच्छा कि मेरा मन भी करने लगा कि क्यों ना मैं एक और खरबूजा लगाऊं और इसी चाहत में मैंने ये खरबूजा बना डाला...और ब्लॉग ब्लॉग लिखने का ये खेल कब खरबूजा बन गया मुझे भी पता नहीं चला...

2 comments:

  1. बेहतरीन है... यकीन मानिए इतना रोचक ब्लॉग मैंने आज तक नहीं पढ़ा। लिखते रहिए ... हालांकि आप वक्त निकाल पाएंगे इसपर मुझे शक है।

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  2. great... It seems there has been a detailed care taken while writing this piece. well done...write more on these humorous lines...could become your forte...

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