
एक हैं संत...नाम है उनका डिब्बी राजा...दस साल राज किया था उन्होने एक राज्य में...कहते हैं उनके जमाने में सड़कें, सरक जाया करती थी...बिजली की मांग इतनी ज्यादा हो गई थी कि वो पानी मांगती थी, लेकिन सत्ता से वो क्या गए...सड़क ने सरकना बंद कर दिया...रही बात बिजली-पानी की तो वो भी लाइन पर आ गए...लिहाजा डिब्बी राजा के पास कुछ काम बचा नहीं इसलिए अब वो संत बन गए और अब वो ट्विट करते हैं...प्रवचन देते हैं...जरूरत पड़ने पर सलाह देने से भी गुरेज नहीं करते...लोग कहते हैं कि वो कांग्रेसी हैं लेकिन पार्टी कई बार उनके बयानों से...उनके किए ट्विट से ही किनारा कर लेती है...इसलिए कुछ लोग उनको एक्सपायरी डिब्बी भी कहने लगे हैं...अब डिब्बी राजा, तो राजा हैं...ऐसे में एक्सपायरी होने के बाद भी अपना असर तो छोड़ेंगे ही...इसलिए वो नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं और निशाने पर उन्ही लोगों को ले रहे हैं जिनको वो अपना आदर्श...अन्ना हजारे और गुरू...रामदेव को मानते थे...तभी तो अपने आदर्श अन्ना हजारे के बारे में वो कहते थे कि मेरे मन में उनके लिए इतना सम्मान है कि कल भी मैं उनके पैर छूता था और आज भी मुलाकात होगी तो पैर छूऊंगा...तो कभी गुरू रामदेव को अन्ना से ज्यादा ईमानदार बताते हैं...अस्ल में एक ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंक रखा है...तो दूसरे ने कालेधन के खिलाफ...और डिब्बी राजा...जिसको अपनी पार्टी बताते हैं वो भ्रष्टाचार और कालेधन से अपना कोई सरोकार नहीं मानती...बल्कि उसका स्लोगन ही यही है ''कांग्रेस का हाथ, महंगाई के साथ"...तभी तो उनकी पार्टी के मंत्री महंगाई के लिए कभी त्योहारों को कोसते हैं, तो कभी लोगों को डराते हैं कि महंगाई अभी और बढ़ेगी...ऐसे में भ्रष्टाचार और कालेधन से जनता का ध्यान ना भटकाया जाए...लेकिन चिंतन का ठेका ले लिया है संत डिब्बी राजा ने...अपने को एक्सपायरी से बचाने के लिए अपने आदर्श अन्ना हजारे को वो ट्विट कर उनको ट्यूबलाइट करार देते हैं तो अपने गुरू रामदेव को ठग...डिब्बी राजा जानते हैं कि कागज में खिंची किसी लाइन को छोटा करने के लिए उसके साथ एक दूसरी बड़ी लाइन खींच दो तो वो लाइन अपने आप छोटी हो जाएगी...इसलिए उन्होने अपने आदर्श और गुरू के समांनतर लाइन खींचने का फैसला लिया...तभी तो अन्ना और रामदेव के किसी बयान पर पार्टी का जवाब आने से पहले अपना बाण छोड़ देना उनकी फितरत में शामिल हो गया है...अब कांग्रेस भी क्या करे उनका नीजि बयान बताकर वो भी पल्ला झाड़ लेती है...दरअस्ल डिब्बी राजा को सबसे ज्यादा खुन्नश है राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से, जिसकी वजह से उन्हे सत्ता का बलिदान करना पड़ा...इतने बड़े त्याग के बाद डिब्बी राजा की नजर में आरएसएस आतंकवादी संगठन बन गया...और हर हिन्दू आतंकवादी...डिब्बी राजा ने जिसे अपना विरोधी माना और उसने कोई बयान दिया नहीं कि वो आरएसएस का आतंकवादी हो गया...दरअस्ल डिब्बी राजा एक खास तबके पर ध्यान लगाये हुए हैं...आखिर वो राजनीतिज्ञ जो हैं...जिस प्रदेश के वो अपनी पार्टी के प्रभारी हैं वहां पर खास तबके की जमात करीब १९ प्रतिशत है...डिब्बी राजा ने भले ही 10 साल राज किया हो...लेकिन करीब इतने ही सालों से वो उस राज्य से बाहर हैं...इसलिए वो मन में कुछ हसरत पाले हुए हैं...लेकिन संत हैं इसलिए जाहिर भी नहीं कर सकते...बड़ी दुविधा में हैं वो...तो आइए हम भगवान से कामना करें की संत डिब्बी राजा का दिल साफ हो...आलोचनाओं का वो संत की तरह सामना करें और उनकी वाणी से ये ना लगे की वो बीमार हैं...GET WELL SOON दिग्विजय सिंह उर्फ दिग्गी राजा उर्फ डिब्बी राजा
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