
अन्ना की फोटो संघ के नेता नानाजी देशमुख के साथ एक अखबार में छपी तो कांग्रेसियों की तो बाछें खिल गई...सबसे पहले फिरकापरस्त, माफ करें कांग्रेस के सेवक राशिद अल्वी मांगने लगे अन्ना से संघ के साथ रिश्तों पर जवाब...राशिद साहब फिलहाल तो राज्यसभा में हैं और कांग्रेस पार्टी के वफादार कहलाते हैं...अगर ज्यादा याद दिलायें तो ये वही हैं जो पहले मायावती को बहन जी कहते थे, अब सोनिया को मैडम...अक्सर ये अपने को जनता से जुडा़ बताते हैं, लेकिन इन महारथी से कोई पूछे कि चुनाव हारने भर से कैसे पाला बदल लिया जाता है ? चलिए जवाब देना है या नहीं इन्ही पर छोड़ देते हैं...
अब बात अपने संत डिब्बी राजा यानी दिग्विजय सिंह की भी कर लेते हैं...सर्द सुबह जब वो उठे होंगे तो अखबार में अन्ना और नानाजी देशमुख की फोटो और खबर देख कलेजे में बड़ी ठंडक पहुंची होगी...सो भला वो भी पीछे कहां रहने वाले थे लगे हाथ फिर अलाप लिया वही पुराना राग संघ और अन्ना का...लेकिन जैसे ही किरण देवी ने दिग्विजय की फोटो नानाजी देशमुख के साथ ट्विटर पर पेश की तो वो पानी भरते नज़र आए...लेकिन अब इन संत डिब्बी राजा यानी दिग्विजय सिंह से कोई पूछे कि क्या वो उस फोटो में नानाजी देशमुख का हालचाल जान रहे हैं...चलिए जवाब देना है या नहीं इन्ही पर छोड़ देते हैं...
अब बात उनकी जिन्होने फोटो छापी...वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता की...जो नई दुनिया के संपादक हैं, जिनके अखबार ने ये फोटो छापी है...अब ये वरिष्ठ कांग्रेसी पत्रकार हैं...इसलिए नहीं क्योंकि ये अन्ना के विरोधी है...बल्कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जब भी मीडिया मैनजमेंट की जरूरत होती है तो अक्सर वो इनको सबसे पहले याद करते हैं इसलिए इनका धर्म है वफादारी निभाना...अपने काम से नहीं बल्कि अपने को मिलने वाले सम्मान से...अक्सर टीवी पर या अपने यार दोस्तों के बीच आपने इनको कहते सुना होगा कि ये निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर जोर देते हैं...अब इनसे कोई पूछे कि जब ये एक फोटो अपने अखबार में छाप रहे थे तो दूसरी फोटो (दिग्विजय और नानाजी देशमुख) इनको क्यों नहीं दिखी ? वाह रे निष्पक्षता...
फोटो का सहारा लेकर जिस तरह तमाशा बनाया गया वो जरा लिखने वाले और देखने वाले पहले थोड़ी पड़ताल कर लेते...दरअसल जिस कार्यक्रम की वो तस्वीर है वो आरएसएस का दो दिन का एक कार्यक्रम था जिसमें भाग लेने के लिए अन्ना उसमें शामिल हुए थे...बात अगर नानाजी देशमुख की करें तो वो खुद समाज सेवक रहे... खासतौर से शिक्षा के क्षेत्र में...सरस्वती शिशु मंदिर उन्ही के दिमाग की उपज थी...ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान करने वाले से अगर कोई मुलाकात करे तो क्या जुर्म है...क्योंकि वो आरएसएस से जुड़ा है सिर्फ इसलिए....तब तो कांग्रेसी भी जिसमें सोनिया, राहुल और मनमोहन शामिल हैं वो भी आरएसएस से ताल्लुक रखते हैं क्योंकि हमारी संसद में कई सांसद आरएसएस से जुड़े हैं जिनसे सिर्फ आम कांग्रेसी ही नहीं सोनिया, राहुल और मनमोहन अक्सर मिलते जुलते हैं...कई कांग्रेसी तो उनके साथ चाय कॉफी ही नहीं खाना पीना तक साथ करते हैं...अन्ना से सफाई मांगने वाले जरा उन फोटो को भी देखें जिसमें कांग्रेस के नेता बलराम जाखड़, समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और ऐसे ही कई नाम नानाजी देशमुख के साथ दिखाई दे रहे हैं तो क्या ये सभी आरएसएस के हो गए...नहीं....ये सिर्फ एक फोटो पर तमाशा है...लोकपाल से ध्यान हटाने के लिए...
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