
इटली वाली सोनिया गांधी रोती भी हैं, ये बताया अपने देश के परिपक्क और खांटी नेता, कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने...चुनावी मौसम में खुर्शीद साहब यूपी के आजमगढ़ में थे, एक सभा में मुसलमान भाइयों के बीच भाषण कर रहे थे, दूसरे राजनीतिक दलों से अपने को अलग दिखाने की मिसालें गिना रहे थे, तालियां भी बज रही थीं...ये देख हमारे नेता जी भी रौ में बह गए...और उखाड़ लाए वही पुराना मसला 'बटला हाउस'...वोट पाने के लिए केंद्र में उनकी सरकार ने क्या-क्या काम किये वो तो उन्होने नहीं गिनाये, लेकिन सहानभूति के वोट पाने के लिए 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के बटला हाउस में हुई मुठभे़ड़ का जिक्र छेड़ दिया...और कहा कि मुठभेड़ के दृश्य देखने के बाद सोनिया गांधी रोईं थी, जिसके बाद उन्होने इस मसले को वजीरेआज़म के पास उठाने की सलाह दी थी...अब श्रीमान सलमान साहब आप प्रतिष्ठित वकिल होने के साथ देश के कानून मंत्री भी हैं, जाहिर है आपसे बेहतर कानून जानने वाले कम ही लोग होंगे...तो ऐसे में आप एनएचआरसी की उस रिपोर्ट को क्यों भूल गए जो उसने कोर्ट में पेश कर कहा था कि ''पुलिस टीम को जब जान का खतरा हुआ तो उन्होंने ऐक्शन लिया और यह कहीं से भी मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं है" रिपोर्ट में कहा गया था कि शहीद पुलिस इंस्पेक्टर एस सी शर्मा और कांस्टेबल बलवंत सिंह पर जब हथियारों से लैस आतिफ अमीन और साजिद ने गोलियां चलाई थी तो उसके जवाब में इन लोगों को गोली चलाने पर मजबूर होना पड़ा...सिर्फ यही नहीं आईपीसी की धारा-100 भी कहती है कि अगर पुलिस टीम को जान का खतरा है या फिर उसे चोट पहुंचाई जा रही है जिससे उसकी जान जा सकती है तो उसे भी अपनी आत्मरक्षा का अधिकार है...इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस जिसके अधीन आती है वो है गृहमंत्रालय...और पी चिदंबरम हैं इसके मुखिया...वो भी कह चुके हैं कि पुलिस मुठभेड़ में आतंकी मारे गए, आम लोग नहीं...बावजूद ऐसे मुद्दों को हवा देना कहां की समझदारी है जनाब सलमान साहब...
डिब्बी राजा उर्फ दिग्विजय सिंह ऐसे अकेले और पहले कांग्रेसी थे जिन्होने इस मुठभेड़ पर सवाल उठाये थे...अब एक जमाने में ''सिमी'' के एडवोकेट रह चुके सलमान खुर्शीद साहब भी इसी राह पर हैं...यही नहीं उन्होने तो उनसे एक कदम आगे जाकर सोनिया गांधी को भी लपेट कर अपनी बात पर मुहर लगा ली...हांलाकि इस बात पर चर्चा कम हुई की मुठभेड़ असली थी या नहीं...चर्चा इस बात पर ज्यादा है कि सोनिया रोईं थी की नहीं...क्योंकि जो मैडम सोनिया के नजदीक रहता है वो ही इसका खुलासा कर सकता है इसलिए जहां सलमान साहब ने मैडम को रोने वाला बताया वही डिब्बी राजा उर्फ दिग्विजय सिंह ने कहा कि वो नहीं रोई थी...ये हाल उस पार्टी का है जिसकी नेता मैडम सोनिया हैं...ये हाल उन नेताओं का है जो अपने को पार्टी का वफादार बताते हैं...ये हाल उनका है जो इस जुगत में रहते हैं कि कौन मैडम सोनिया के ज्यादा करीब है...ये हाल उन इंसानों का है जो अपने हितों को साधने के लिए आगे बढ़ने की बात छोड़....इंसानों को इसानों से लड़ाने की कोशिश में रहते हैं...